Ek Sapna, Ek Aansu

"Ek


Sapna, Ek Aansu"


Raat ke सन्नाटे में,

ek चेहरा उभरा — भीगा हुआ, टूटा हुआ,

आँखों से बहते थे वो जज़्बात,

jo शायद दिल से कभी निकले ही नहीं थे।


Main dekhta रहा —

kuch कह भी ना सका,

shayad meri ख़ामोशी hi uske दर्द ka जवाब thi...


Woh चुपचाप रो रहा tha,

jaise किसी अधूरी बात ki सज़ा ho

ya कोई याद ho jo अब भी जलती ho

सीने ke किसी कोने में...


Sapna tha —

par एहसास हक़ीक़त से भी gehra tha,

jaise किसी रूह ने छू लिया ho mujhe

ek पल ke लिए, ek सदियों जैसे लम्हे में.


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